देहरादून। प्रदेश में मुख्यमंत्री घसियारी योजना के शुभारम्भ से पहले ही इस पर सियासत तेज हो गई है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह देहरादून में इस योजना का शुभारम्भ 30 अक्टूबर को करने वाले हैं। सीएम घसियारी योजना को के सहकारिता मंत्री डा० धन सिंह रावत जोर-शोर से इस योजना को प्रचारित कर रहे हैं। बाकायदा सरकारी हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक प्रदेशभर में इस घसियारी कल्याण योजना कार्यक्रम का प्रदेश भर में 900 जगहों पर सजीव प्रसारण किया जाएगा। डा० धन सिंह रावत का दावा है कि मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना के शुरू होने से सूबे की करीब तीन लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं के सर से बोझ खत्म होगा।
क्या है घसियारी कल्याण योजनाः
मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना का मकसद सूबे की करीब तीन लाख से अधिक ग्रामीण महिलाओं के सर से बोझ खत्म करना है। इस योजना के तहत उनके घर पर पैक्ड सायलेज (सुरक्षित हरा चारा) एवं संपूर्ण मिश्रित पशु आहार उपलब्ध कराना है। इस योजना के तहत पात्र महिलाओं को घसियारी किट भी बांटी जाएगी जिसमें कुदाल, दरांती, टिप्पन और एक बैग शामिल है। चरण में मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना प्रदेश के चार पर्वतीय जिलों पौड़ी, रूद्रप्रयाग, अल्मोड़ा तथा चम्पवात में संचालित की जायेगी, इसके उपरांत अन्य जिलों में भी योजना शुरू की जायेगी।
घसियारी कल्याण योजना पर सियासत
धन सिंह रावत मुख्यमंत्री घसियारी कल्याण योजना को लेकर खासे उत्साहित हैं। चुनाव की दहलीज पर पहुंच चुकी भाजपा पहले चरण में इस योजना की शुरूआत चार पर्वतीय जिलो से कर रहे हैं। जानकार बताते हैं इस योजना के जरिये पार्टी का मकसद महिला मतदाताआं को साधना है। कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत बाकायदा अपने निर्वाचन क्षेत्र श्रीनगर में इस योजना को प्रचारित प्रसारित कर रहे हैं। क्षेत्र में उनके भाषणों के वीडियो सोशल मीडिया पर वाइरल हो रहे हैं।
वही सूबे के पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत मुख्यमंत्री घसियारी योजना को लेकर खासे उत्साहित दीखते हैं। अपने मुख्यमंत्री काल के दौरान उन्होंने गैरसैण से पहली दफा इस स्कीम को लागू किये जाने की घोषणा की थी। वे कहते है कि 30 अक्टूबर को मेरा एक और सपना साकार होने जा रहा है। माताओं-बहनों के सर से घास की गठरी को हटाने का हमारा प्रण अंतिम चरण ले चुका है। प्रदेश में मुख्यमंत्री घस्यारी कल्याण योजना से उनके सर से घास की गठरी हटेगी।
विपक्ष इस योजना पर ही सवाल कर रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल सरकार की इस योजना पर तंज कसते हुए कहते हैं कि कैबिनेट मंत्री अब बेटियों के हाथ में कलम की बजाय दरांती थमाने चाहते हैं। अब जनता ने ही तय करना है कि वे अपनी बेटियों के हाथ में कलम चाहते हैं या दरांती?
वही खिर्सू ब्लाक से ताल्लुक रखने वाले समाजसेवी महादेव प्रसाद बहुगुणा कहते हैं कि पहाड़ में घास का कोई संकट नहीं हैं। भले ही राज्य सरकार चुनावी माइलेज लेने के लिए स्कीम लांच कर रही हो लेकिन आने वाले समय में इस स्कीम से लाभ की बजाय नुकसान ही होगा। उन्होंने मिसाल देते हुए कहा कि फ्री राशन की स्कीम के नतीजे सबके सामने है। पहाड़ में लोगों ने अब खेती करना छोड़ दिया है और खेत बंजर पड़ गये हैं। वहीं इस स्कीम के चलते पशुपालक भी खत्म हो जाएंगे।
भाकपा माले के नेता और जाने-माने आंदोलनकारी इन्द्रेश मैखुरी घसियारी कल्याणी योजना पर कहते हैं कि भाजपा ने भ्रष्टाचार का एक ओर नया रास्ता खोल दिया है। पूरी स्कीम अपने भाई-भतीजों और कार्यकर्ताओं के प्लेसमेंट के लिए तैयार की गई हैं। सारा खेल कमीशन और टेंडर के लिए रचाया गया है।
यकेूडी के युवा प्रकोष्ठ के प्रचार सचिव योगेश शुक्ला कहते हैं कि भाजपा सरकार जो घसियारी योजना शुरू कर रही है उसका स्वागत है। हमारे पहाड़ की माताएं-बहने किन किन परिस्थितियों मे घास काटती हैं ये हम पहाड़वासी ही जानते हैं। लेकिन देखने वाली बात ये होगी कि यह योजना धरातल पर कितना उतरती है? या ये दूसरी योजनाओं की तरह ही भ्रष्टचार का शिकार होगी।