Home उत्तराखंड महाकुम्भ में नागा साधुओं ने ली संन्यास की दीक्षा

महाकुम्भ में नागा साधुओं ने ली संन्यास की दीक्षा

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हरिद्वार। हरिद्वार कनखल में संन्यास रोड स्थित श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा में 75 नागा संन्यासी बनाने की प्रक्रिया प्रारंभ की गई। सबसे पहले नागा सन्यासी बनने वालों को ब्रह्मचारी की दीक्षा दी गई। कनखल के संन्यास मार्ग स्थित हरि भारती आश्रम में गंगा तट पर इन ब्रहमचारीगणों को दंड दिया गया और यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। इसके साथ ही गंगा स्नान कराने के बाद भस्मी निशान कराया गया।

सभी नागा संन्यासियों ने सामूहिक पूजन किया भजन किया। श्री पंचायती महानिर्वाणी अखाड़ा के महन्त विनोद पूरी हनुमान बाबा ने बताया कि नागा सन्यासी बनने से पहले संतो को अपना पिंड दान करना पड़ता है, जिसे विजया होम संस्कार कहते हैं। इसमें नागा बनने वाले पात्र को अपना पिंड दान करना पड़ता है उन्होंने कहा कि नागा सन्यासी बनने की परंपरा आदि जगतगुरु शंकराचार्य के काल से चली आ रही है यह नारा सन्यासी एक तरह की अखाड़ों की फौज होते हैं जो धर्म की रक्षा व धर्म का प्रचार करते हैं और अखाड़ों की व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं।

अखाड़ा के महन्त विनोद गिरी हनुमान बाबा ने बताया कि इन नागा संन्यासियों को संन्यास दीक्षा से पहले ब्रह्मचारी बनाया जाता है और यह गंगा स्नान कर और अपना श्राद्ध तर्पण कर नागा सन्यासी दीक्षा के पात्र बन जाते हैं। शुक्रवार से दषनाम संन्यासी परंपरा में दीक्षित होकर महानिर्वाणी अखाड़ा के नागा साधु बन जाएंगे और यह अखाड़े की व्यवस्था में सहयोग करेंगे। कुछ नागा गुफाओं में या अन्य जगह अपनी साधना और तपस्या करने के लिए अपनी इच्छा से चले जाएंगे। यह नागा साधु 12 अप्रैल और 14 अप्रैल के शाही स्नान में शामिल होंगे।

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