समान नागरिक संहिता महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करने का अच्छा प्रयास है,लेकिन इसके कुछ पहलुओं पर समीक्षा की आवश्यकता है। जिससे इसके स्वरूप को ‘सामान्य नागरिक संहिता’ (कॉमन सिविल कोड) में बदला जा सके यह विचार डॉ विक्रम सिंह बर्त्वाल ने एनएसएस यूनिट के द्वारा एक दिवसीय कार्यशाला में व्यक्त किये।
बताते चलें कि राजकीय महाविद्यालय नरेंद्र नगर की एनएसएस यूनिट ने आज ‘यूनिफॉर्म सिविल कोड’ विषय को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया।
कार्यशाला में डॉ जितेंद्र नौटियाल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। डॉक्टर संजय कुमार ने यूनिफॉर्म सिविल कोड का अर्थ एवं इसके व्यावहारिक प्रभावों की चर्चा की है।
इस अवसर पर कॉलेज प्राचार्य यू सी मैठाणी ,प्राध्यापक डॉ देवेंद्र कुमार, डॉ विजय प्रकाश, डॉ सृचना सचदेवा,डॉ चेतन भट्ट,डॉ सुधारानी, डॉ इमरान अली, डॉ सुशील कगडियाल, डॉ ज्योति शैली, डॉ बी पोखरियाल, डॉ सोनी तिलारा, डॉ नूपुर गर्ग, डॉआराधना सक्सेना,मंजू मेहता,भूपेंद्र, मुनेंद्र, विशाल त्यागी, अनूप नेगी, यूनिफॉर्म सिविल कोड कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ मनोज फ़ोंदणी तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम की सफलता के लिए नोडल अधिकारी डॉ फ़ोंदणी ने सभी उपस्थित जनों का आभार प्रकट किया।
