Home उत्तराखंड  वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे पर न्यूरोडायवर्सिटी पर विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन

 वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे पर न्यूरोडायवर्सिटी पर विचारोत्तेजक पैनल चर्चा का आयोजन

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देहरादून। डी.ए.वी. (पी.जी.) कॉलेज, देहरादून में वर्ल्ड ऑटिज्म अवेयरनेस डे के अवसर पर “न्यूरोडायवर्सिटी को अपनाना: शिक्षा और उससे आगे समावेशन” विषय पर एक सारगर्भित पैनल चर्चा का आयोजन ठाकुर पूरन सिंह नेगी मेमोरियल ओएनजीसी सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम पर मौजूद व्यक्तियों के प्रति समझ, सहानुभूति और समावेशी दृष्टिकोण को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम की शुरुआत दोपहर 2:00 बजे दीप प्रज्वलन के साथ हुई, जिसमें अनेक गणमान्य अतिथियों ने भाग लिया। कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुनील कुमार ने स्वागत भाषण दिया और समावेशी शिक्षा के महत्व तथा ऑटिज़्म के प्रति जागरूकता फैलाने के प्रति संस्था की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

मनोविज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. रेणुका जोशी ने “ऑटिज़्म अवेयरनेस डे का महत्व और इसकी व्यापकता” विषय पर एक सूचनात्मक प्रस्तुति दी। इसके पश्चात शिक्षक शिक्षा विभाग की डॉ. उषा पाठक ने “समावेशी कक्षा हेतु भावी शिक्षकों की तैयारी” विषय पर विचार रखे और शिक्षकों के प्रशिक्षण में ऑटिज़्म के प्रति संवेदनशीलता की आवश्यकता पर बल दिया।

पैनल चर्चा का संचालन प्रो. एस.पी. जोशी ने किया और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए:
• डॉ. मनीषा श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, क्लिनिकल साइकोलॉजी, एचआईएमएस ने “न्यूरोडायवर्सिटी और मानसिक स्वास्थ्य” विषय पर मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित सहायक ढांचे की आवश्यकता पर बल दिया।
• मिस आरती नायर, विशेष शिक्षिका, लाटिका फाउंडेशन, ने “ऑटिस्टिक विद्यार्थियों के लिए समावेशी शैक्षणिक वातावरण का निर्माण” विषय पर व्यावहारिक अनुभव और श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों को साझा किया।
• डॉ. दिव्या घई चोपड़ा, एम.डी. साइकियाट्री, ने “ऑटिज़्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर की शीघ्र पहचान, निदान और चिकित्सीय हस्तक्षेप” विषय पर जानकारी साझा की और समय पर चिकित्सकीय सहायता के महत्व को बताया।
• श्रीमती सुनीष्ठा सिंह, एक ऑटिस्टिक बच्चे की अभिभावक, ने “स्पेक्ट्रम पर पालन-पोषण” विषय पर भावुक और प्रेरणादायक विचार प्रस्तुत किए, जिसमें परिवारों के अनुभवों, संघर्षों और खुशियों की झलक थी।

कार्यक्रम का समापन एक जीवंत प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें विद्यार्थियों, शिक्षकों और उपस्थितजनों ने पैनलिस्टों से संवाद किया। इसके पश्चात प्रो. देवना शर्मा ने औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।

यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा और इसमें विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों, विद्यार्थियों तथा विशेषज्ञों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इसने सहानुभूति, अंतर्विषयी संवाद और नीतिगत परिवर्तनों की आवश्यकता को रेखांकित किया ताकि शिक्षा प्रणाली वास्तव में समावेशी और न्यूरोडायवर्स व्यक्तियों के प्रति संवेदनशील बन सके।

आई.क्यू.ए.सी. की समन्वयक डॉ. ओनिमा शर्मा ने न्यूरोडायवर्स विद्यार्थियों के लिए समावेशी शैक्षणिक प्रथाओं को प्रोत्साहित करने और संस्था की प्रतिबद्धता को दोहराया। शिक्षकों ने अपने प्रश्नों पर विशेषज्ञों से चर्चा की

कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के संकाय सदस्य जैसे प्रो. सविता रावत, प्रो. अंजू बाली, प्रो. रंधावा, प्रो. आर.बी. पांडे, प्रो. जी.पी. डंग, प्रो. शिखा नागालिया, प्रो. डी के त्यागी, प्रो यू यस राणा,डॉ गोपाल छेत्री, प्रो मृदुला डॉ राजेश पाल, डॉ प्रो रमेश शर्मा, डॉ आर के पाठक डॉ जीवन मेहता, प्रो अशोक श्रीवास्तव, डॉ अनिल पाल प्रो प्रशांत,डॉ अतुल सिंह, डॉ. अनूप मिश्रा, डॉ. नैना, डॉ रीना उनियाल, डॉ एस वी त्यागी, डॉ विवेक त्यागी, डॉ मनोज जादौन, डॉ डी के गुप्ता, डॉ राजेश रावत डॉ चांदपुरी, डॉ संदीप, डॉ पूनम मिश्रा, , डॉ कंचन, डॉ शैली गुप्ता, डॉ प्रगति, और डॉ. ज्योति भी उपस्थित रहे और उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए सक्रिय भागीदारी की।

इस अवसर पर ‘मंत्रणा’ सोसाइटी के उत्साही छात्रों का विशेष उल्लेख आवश्यक है, जिन्होंने पूरे आयोजन की समन्वय प्रक्रिया में अत्यंत उत्साह और समर्पण के साथ योगदान दिया।

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